अरिजीत सिंह का फ़िल्मी गायन से मोहभंग होने का फैसला संगीत जगत के लिए किसी भूकंप से कम नहीं। जिनकी आवाज ने तुम ही हो, चन्ना मेरेया और 'रोंगटी' जैसे गीतों से लाखों दिलों को छू लिया, ने अचानक फिल्मी गायन को अलविदा कह दिया। उनका यह पलायन फिल्म उद्योग पर गहरा असर डालने वाला है। इस पार्श्व गायक ने एक दशक में दर्जनों हिट एल्बम दिए, राष्ट्रीय पुरस्कार जीते और प्लेबैक सिंगिंग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उनकी अनोखी सादगी, भावपूर्ण गायकी और युवा पीढ़ी से गहरे जुड़ाव ने उन्हें 'सुपर स्टार सिंगर' बना दिया। लेकिन, अब यह विदाई क्यों! क्या निजी कारण, इंडस्ट्री की कमियां या नई राह की तलाश! अरिजीत के बिना फिल्मी संगीत में सूनापन आना तय है। इससे नए गीतकारों के लिए चुनौती बढ़ेगी और प्रशंसक हताश होंगे। उनका यह फैसला हिंदी सिनेमा के संगीत को क्या नई दिशा देगा, क्या यह किसी पुनर्रचना का समय है!
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- हेमंत पाल
फिल्मों के पार्श्व गायन के इतिहास में कुछ आवाजें कान तक पहुंचती हैं, लेकिन कुछ सीधे रूह में उतरती हैं। मोहम्मद रफी, किशोर कुमार और सोनू निगम के बाद अगर किसी एक नाम ने पूरे देश की धड़कन को नियंत्रित किया, तो वह हैं अरिजीत सिंह। हाल के दिनों में उनके फिल्मी गायकी से दूरी बनाने की चर्चाओं ने प्रशंसकों को उदास कर दिया। लेकिन, गहराई से देखें तो यह 'अंत' नहीं एक 'रूपांतरण' है। एक कलाकार जब अपनी कला के चरम पर होता है, तो वह अक्सर व्यावसायिकता की बेड़ियों को तोड़कर संगीत की शुद्धता की ओर लौटना चाहता है। अरिजीत का फिल्मों से मोहभंग होना दरअसल उनके संगीत के प्रति उस गहरे प्रेम का हिस्सा है, जो चार्टबस्टर्स से ऊपर उठकर वास्तविक 'कला' की तलाश में है। अरिजीत ने पहले भी कई बार संकेत दिया कि फिल्म इंडस्ट्री का काम करने का तरीका थका देने वाला है। उनका मानना है कि फिल्मों में संगीत 'कहानी' के अधीन होता है, जिससे कलाकार की रचनात्मक आजादी में बेड़ियां पड़ जाती है। उन्होंने अपना खुद का लेबल 'ओरियन म्यूजिक' शुरू किया, जिसके जरिए वे गैर-फिल्मी, शुद्ध संगीत को बढ़ावा दे रहे हैं। इसके अलावा वे बंगाली संगीत से भी अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं। वे बंगाली लोक संगीत व स्वतंत्र गीतों पर अधिक ध्यान दे रहे।
अरिजीत सिंह के संन्यास या फिल्मों में कम सक्रिय होने की खबर ने संगीतकारों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया कि अरिजीत के बाद कौन! पिछले एक दशक में लगभग हर फिल्म में दूसरा हिट गाना उनकी आवाज में रहा। उनकी गैरमौजूदगी में फिल्म संगीत में जो खालीपन आएगा, उसे भरना फिलहाल मुश्किल नजर आता है। अरिजीत सिंह का फिल्मों से मोहभंग होना, उनके 'संगीत' के खत्म होने का संकेत नहीं, बल्कि यह उनके 'संगीतज्ञ' के रूप में पुनर्जन्म जैसा है। वे एक ऐसे कलाकार हैं जो जब स्टेज पर उतरते हैं, तो लाखों की भीड़ को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। उनका संन्यास दरअसल व्यावसायिक शोर से 'मौन' की तरफ की एक यात्रा है। वे आगे भी संगीत से जुड़े रहेंगे और शायद अब वे हमें वह संगीत देंगे, जो फ़िल्मी कथानक की मांग से नहीं, बल्कि उनके दिल की गहराई से निकलेगा। अरिजीत सिंह स्वभाव से बेहद अंतर्मुखी हैं, लेकिन उनका करियर विवादों से अछूता नहीं रहा। उनके छोटे से संगीत करियर में कई बड़े विवाद हुए। सलमान खान की फ़िल्म 'सुल्तान' के गाने 'जग घूमेया' का विवाद जगजाहिर है। एक अवॉर्ड फंक्शन के दौरान अरिजीत और सलमान के बीच हुई हल्की नोकझोंक ने बड़ा रूप ले लिया था। इसका परिणाम यह हुआ कि सलमान की फिल्म 'सुल्तान' से अरिजीत का गाना हटा दिया। अरिजीत ने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी, लेकिन सलमान के साथ उनके रिश्ते लंबे समय तक ठंडे रहे।
अरिजीत की सफलता का सबसे बड़ा राज उनकी गायकी की विविधता को माना जा सकता है। उनके पास एक ऐसी आवाज है, जो अकेलेपन का दर्द बयां करती है। 'जुदा होके भी' जैसे गानों में उनकी आवाज का कंपन रूह कंपा देता है। उनकी गायकी की जड़ें हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में भी गहरी हैं, जो 'लाल इश्क' जैसे कठिन गीतों में स्पष्ट दिखती है। जहां तक मॉडर्न टेक्सचर की बात है, तो वे जैज़, रॉक और सूफी को भी उतनी ही सहजता से गाते हैं। वे अक्सर मीडिया और रियलिटी शो के बनावटीपन की आलोचना करते रहे हैं। एक बार रिकॉर्डिंग स्टूडियो में फोटोग्राफर्स के साथ उनकी झड़प भी चर्चा का विषय बनी थी। उन्होंने बेबाकी से स्वीकार किया कि आज के दौर में गानों में 'पिच करेक्शन' का इस्तेमाल होता है, जिसे लेकर संगीत उद्योग के पुराने दिग्गजों के बीच बहस छिड़ गई थी। उनकी सहजता इस बात से आंकी जा सकती है कि उनके लिए सफलता का मतलब दिखावा नहीं है। यही वजह है कि करोड़ों कमाने वाले इस सिंगर ने गांव की शांति चुनी, जो आज के दौर में दुर्लभ है। उनका फिल्म संगीत से संन्यास का फैसला नई पीढ़ी के युवाओं को प्रेरित करेगा कि शोहरत के बाद भी अपनी जड़ों को कभी न भूलें। लेकिन, अरिजीत की आवाज के बाद फिल्म इंडस्ट्री पर ये असर पड़ेगा कि रोमांटिक ट्रैक्स सूने पड़े रहेंगे।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के एक छोटे से कस्बे जीगंज से निकलकर मुंबई की चकाचौंध में अपनी जगह बनाना उनके लिए आसान नहीं था। 2005 में 'फेम गुरुकुल' जैसे रियलिटी शो से बाहर होने के बाद, उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने संगीतकार प्रीतम के साथ बतौर असिस्टेंट काम किया और प्रोग्रामिंग सीखी। यह तकनीकी समझ ही आज उनके संगीत को दूसरों से अलग बनाती है। 2013 में आई फिल्म 'आशिकी 2' के गाने 'तुम ही हो' ने उन्हें रातों-रात ग्लोबल आइकन बनाया। इसके बाद चन्ना मेरेया, फिर ले आया दिल और 'हवाएं' जैसे गानों ने उन्हें वह मुकाम दिया जहां उनकी तुलना दिग्गज गायकों से होने लगी। अरिजीत सिंह की कहानी सिर्फ गानों की नहीं, बल्कि एक साधारण इंसान की है जो ग्लैमर की दुनिया में रहने के बावजूद जमीन से जुड़ा रहा। वे मुंबई के अपने अपार्टमेंट में सिर्फ काम के लिए जाते हैं, उनकी असल जिंदगी तो जीगंज में ही बीतती है। वे सड़कों पर घूमते हैं, बच्चों को लोकल स्कूल में पढ़ाते हैं। अरिजीत ने कभी अमीरी का दिखावा नहीं किया। सादगी उनके फैसले की जड़ में है। प्लेबैक सिंगिंग में फिल्मों की डिमांड, डेडलाइन और कंपोज आते हैं। अरिजीत हमेशा कहते रहे कि वो मूल रूप से आजाद संगीतकार बनाना चाहते थे। 'फेम' से पहले की वो दुनिया उन्हें ज्यादा पसंद है, जहां प्रयोग और व्यक्तिगत एक्सप्रेशन मायने रखते थे।
अरिजीत का फिल्म संगीत सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। 2016 में 'सुल्तान' का विवाद चरम था। 'जग घूमेया' उनका गाया रोमांटिक ट्रैक था, जो सलमान खान और अनुष्का शर्मा पर फिल्माया गया। लेकिन, रिलीज में राहत फतेह अली खान का वर्जन रखा गया। अरिजीत ने सोशल मीडिया पर सलमान से सार्वजनिक माफी मांगी: 'प्लीज मेरा गाना न हटाएं, उसी के साथ रिटायर होने दें।' पोस्ट डिलीट कर दी, लेकिन हंगामा मच गया। अफवाहें उड़ीं कि सलमान ने उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की कोशिश की। फिर भी, अरिजीत रुके नहीं। हर फिल्म में उनका गाना मिलता रहा। 2023 में 'टाइगर 3' ने सुलह कराई। उन्होंने 'रुआन' और 'लेके प्रभु का नाम' गाए। सलमान ने प्रमोशन में इसे पहली कोलेबरेशन कहा। बाद में सलमान यह भी बोले कि अरिजीत मेरे अच्छे दोस्त हैं, मिसअंडरस्टैंडिंग मेरी थी। आगे 'गलवान' में भी गाएंगे। ऐसे विवादों के फैसले को रोचक जरूर बनाया। सोनू निगम विरुद्ध अरिजीत की फैन-वॉर भी हमेशा चलती रही। लेकिन, सोनू ने हमेशा उन्हें टॉप पर रखा और अरिजीत ने भी कभी होड़ नहीं लगाई। साफ है कि प्लेबैक ने उन्हें स्टार बनाया, लेकिन बेड़ियां भी डाली। अब आजाद संगीत में पूरा आसमान खुला है। न डायरेक्टर की मर्जी, न स्टार्स का दबाव। फैंस का दिल टूटा, पर ये नया रूप उनकी सादगी से मेल खाता है।
उनका ये बदलाव स्वाभाविक भी लगता है। फिल्मों में हर बड़ी फिल्म में उनका एक गाना होना उनके लिए थकाऊ फॉर्मूला बन गया था। अरिजीत ने कभी खुद को स्टार नहीं माना। फैंस के लिए ये शॉक है, पर उनके लिए एक बंधन से मुक्ति है। दरअसल, मॉडर्न फिल्म इंडस्ट्री में अरिजीत की आवाज अनिवार्य सी हो गई थी। उनके बिना 'पैरलल सिनेमा' से लेकर मेनस्ट्रीम तक गाने फीके लगेंगे। लेकिन, अरिजीत के लिए यह फैसला करियर रिव्यू की तरह है। उनके इंडिपेंडेंट ट्रैक्स पहले से हिट हैं। शायद नया एल्बम धमाल मचाए। फैंस को उम्मीद कि ये विदाई स्थायी न हो। अंत में, अरिजीत सिंह सिर्फ सिंगर नहीं, एक प्रेरणा हैं। प्लेबैक छोड़ना उनका साहसिक कदम है। जो शोहरत से ऊपर खुद को चुनते हैं। क्या ये सपना टूटा या नया सपना शुरू होगा, ये तो आने वाला वक्त बताएगा। सिनेमा के इस 'सुपर सिंगर' का यह फैसला न सिर्फ म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए सदमा जैसा है, बल्कि एक सांस्कृतिक बदलाव का संकेत भी। क्या ये शोहरत की चरम पर थकान है या व्यक्तिगत स्वतंत्रता की तलाश! अभी इस सवाल का जवाब बाहर आना बाकी है।
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