भारतीय सिनेमा का भक्ति परंपरा से नाता उसकी स्थापना के समय से ही अटूट रहा है। जब मूक फिल्मों के बाद परदे ने बोलना सीखा, तब पौराणिक आख्यानों और देव चरित्रों ने सिनेमा कैनवास को एक नई पहचान दी। ब्लैक एंड व्हाइट दौर की धार्मिक फिल्मों से लेकर आज के आधुनिक, तकनीक-संचालित और एक्शन-प्रधान सिनेमा तक, पटकथाओं में ईश्वर के प्रति आस्था को अलग-अलग तरीकों से बुना गया है। यद्यपि फिल्मों के कथानक में समय-समय पर अनेक देवी-देवताओं का स्मरण किया गया। लेकिन, ब्लैक एंड व्हाइट ज़माने से लेकर आज के दौर तक सबसे अधिक उपस्थिति, पूजा और वंदना जिस देव की दिखाई दी, वे विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश हैं। उनके ठीक बाद यदि किसी देव की लीला, भक्ति और जीवन दर्शन का प्रभाव भारतीय फिल्मों पर सबसे गहरा और व्यापक रहा, तो वे हैं भगवान श्रीकृष्ण। फिल्मों में गानों की रचना की दृष्टि से भी देखा जाए, तो गजानन के ही सबसे अधिक और ऊर्जावान गीत रचे गए, जो दशकों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते आ रहे हैं।
000
- हेमंत पाल
सिनेमा और भक्ति का रिश्ता उतना ही पुराना है जितना भारतीय फिल्म उद्योग का इतिहास। जब मूक सिनेमा का दौर समाप्त हुआ और सवाक फिल्मों का आगमन हुआ, तब पौराणिक कथाओं और देवताओं की स्तुति को कहानियों का केंद्र बनाया गया। फिल्मों के कथानक में समय-समय पर अनेक देवी-देवताओं का स्मरण किया गया, लेकिन ब्लैक एंड व्हाइट दौर से लेकर आज के आधुनिक मल्टीप्लेक्स सिनेमा तक, जिस देव की सबसे अधिक वंदना और भक्ति परदे पर दिखाई दी, वे विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश हैं। उनके बाद यदि किसी देव का प्रभाव सिनेमाई कैनवास पर सबसे गहरा रहा, तो वे हैं लीलाधर भगवान श्रीकृष्ण। भारतीय संस्कृति में गणेश जी प्रथम पूज्य हैं। सिनेमा ने भी इस परंपरा का अक्षरशः पालन किया। किसी भी बड़े मिशन, पारिवारिक कहानी, एक्शन ड्रामा या गैंगस्टर थ्रिलर में संकट के निवारण अथवा नई शुरुआत के लिए प्रथम पूज्य गजानन की वंदना अनिवार्य अंग बनी। शुरुआती ब्लैक एंड व्हाइट दौर में 'श्री गणेश महिमा' और 'श्री गणेश विवाह' जैसी धार्मिक फिल्मों से शुरू हुआ यह सफर व्यावसायिक सिनेमा के ताने-बाने में इस तरह रचा-बसा कि 'देवता' केवल मंदिर के दृश्य तक सीमित न रहकर सीधे कथानक का हिस्सा बन गए।
फिल्मों में गणेश जी के गानों की बहुलता और उनकी स्वीकार्यता का मुख्य कारण उनका विघ्नहर्ता रूप और मराठी संस्कृति में गणेशोत्सव का बृहद प्रभाव है। मुंबई, जो हिंदी सिनेमा की कर्मभूमि है, वहाँ गणेशोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान न होकर एक सामाजिक उत्सव है। फिल्मकारों ने इस स्थानीय ऊर्जा को पर्दे पर उतारने के लिए गणेश जी पर केंद्रित गीतों को कहानी के महत्वपूर्ण मोड़ (क्लाइमेक्स या टर्निंग पॉइंट) पर इस्तेमाल किया। ब्लैक एंड व्हाइट और क्लासिक दौर में गणेश वंदना का रूप पारंपरिक और शास्त्रीय रहा। 'श्री गणेश विवाह' का प्रसिद्ध गीत 'जय वंदन गिरिजा के नंदन' या 'हमसे बढ़कर कौन' का कालजयी गीत 'देवा हो देवा गणपति देवा, तुमसे बढ़कर कौन' इस बात का प्रमाण हैं कि किस प्रकार गणेश वंदना पूरे जनमानस को झूमने पर मजबूर कर देती थी। फिल्म 'दर्द का रिश्ता' में 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' ने मानवीय संवेदनाओं और बीमारी से जूझती एक बच्ची के भावनात्मक मोड़ को गणेश उत्सव से जोड़ा।
जैसे-जैसे सिनेमा बदला, गणेश गीतों का शिल्प भी बदला। 90 के दशक में फिल्म 'वास्तव' का गीत 'सिंदूर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुख को' एक ओर तो गंभीर पूजा की अनुभूति कराता है, वहीं दूसरी ओर कहानी में नायक के जीवन में आने वाले बड़े तूफान का संकेत देता है। इसके बाद आधुनिक दौर की 'अग्निपथ' का 'देवा श्री गणेशा' गीत न केवल संगीत की दृष्टि से भव्य है, बल्कि यह नायक के प्रतिशोध और धर्म युद्ध की शुरुआत का प्रतीक बनता है। इसी तरह 'डॉन' फिल्म में 'मोर्या रे बाप्पा मोरिया रे', 'एबीसीडी' का 'हे गणराया' और 'बजरंगी भाईजान' में 'सेलफ़ी ले ले रे' के साथ गणेश वंदना का समावेश यह दर्शाता है कि गणेश जी का प्रभाव हर वर्ग के सिनेमा में शीर्ष पर रहा है। गणेश जी के बाद हिंदी सिनेमा के कथानक और संगीत पर सबसे गहरा प्रभाव भगवान श्रीकृष्ण का रहा है। श्रीकृष्ण का चरित्र बहुआयामी है। वे माखनचोर हैं, प्रेमी हैं, मित्र हैं, कूटनीतिज्ञ हैं और न्याय के रक्षक हैं। इसी कारण फिल्मकारों ने कृष्ण लीला को विभिन्न मानवीय भावनाओं को दर्शाने के लिए उपयोग किया। विशेष रूप से जन्माष्टमी के अवसर पर माखन मटकी फोड़ने के दृश्य हिंदी फिल्मों का एक बेहद लोकप्रिय फॉर्मेट बने।
फिल्म 'ब्लफ मास्टर' का गीत 'गोविंदा आला रे आला जरा मटकी संभाल बृजबाला' ने सिनेमा में दही हांडी की परंपरा को अमर कर दिया। इसके बाद 'खुद्दार' का 'मच गया शोर सारी नगरी रे', 'हेलो ब्रदर' का 'चांदी की डाल पर सोने का मोर' और आधुनिक सिनेमा में 'ओ माय गॉड' का 'गो गो गोविंदा' यह स्पष्ट करता है कि श्रीकृष्ण का बाल-रूप और उनकी नटखट लीलाएं युवाओं के उल्लास को दिखाने का सबसे सशक्त माध्यम बनीं। जहाँ एक तरफ कृष्ण के गोकुल अवतार को उत्सव के रूप में दिखाया गया, वहीं दूसरी ओर उनके प्रेमावतार राधा-कृष्ण के संबंध को प्रेम गीतों के रूप में पेश किया गया। फिल्म 'लगाान' का 'राधा कैसे ना जले' गीत शास्त्रीयता और समकालीन सिनेमा का बेहतरीन उदाहरण है, जहां नायक-नायिका के बीच के मीठे प्रेम-कलह को राधा और कृष्ण के प्रसंग से जोड़ा गया। इसी तरह 'सत्यम शिवम सुंदरम' का 'यशोमति मईया से बोले नंदलाला' और 'गाइड' का 'पिया तोसे नैना लागे रे' में छिपी कृष्ण भक्ति का प्रभाव सिनेमा इतिहास की अमूल्य धरोहर है।
यदि तुलनात्मक दृष्टि से देखा जाए तो गणेश जी और श्रीकृष्ण दोनों का ही उपयोग फिल्मों में अलग-अलग उद्देश्यों के लिए हुआ, लेकिन गानों की संख्या और उत्सवधर्मिता के मामले में गणेश जी हमेशा आगे रहे। गणेश जी के गीत अक्सर फिल्म के मुख्य नायक के बड़े संकल्प, समाज के एकत्रीकरण या फिर किसी विशाल आयोजन को स्थापित करने के लिए रचे गए। गणेश जी का रूप विघ्नहर्ता का है, इसलिए जब भी कहानी में कोई बड़ा संकट आया या किसी बड़े मिशन की शुरुआत हुई, तो पटकथा लेखकों ने गणेश वंदना का ही सहारा लिया। दूसरी ओर, श्रीकृष्ण के भजनों और गीतों का प्रयोग चरित्रों के व्यक्तिगत भावों, भक्ति, नटखटपन, प्रेम या जीवन दर्शन को उभारने के लिए किया गया।
'शोले' में जब भी धार्मिक आस्था या न्याय की बात आती है तो पृष्ठभूमि में ईश्वर का स्मरण होता है, लेकिन जब त्यौहार और जनसमूह के बीच ऊर्जा भरने की बात आती है, तो गणेश उत्सव का दृश्य सबसे अधिक प्रभावशाली सिद्ध होता है। ब्लैक एंड व्हाइट दौर के सादे और भक्तिभाव से पूर्ण भजनों से लेकर आज के रॉक और फ़्यूज़न धुनों पर थिरकते गणेश वंदना के गानों तक, सिनेमा ने यह सिद्ध किया है कि विघ्नहर्ता भगवान गणेश भारतीय दर्शकों के दिल के सबसे करीब हैं। गणेश जी के गीतों की लय में जो सामूहिकता, ढोल-ताशों की गूँज और उत्साह होता है, वह किसी भी अन्य देव स्तुति की तुलना में सिनेमाई पर्दे पर अधिक भव्य और प्रभावशाली दिखता है। इसी कारण ब्लैक एंड व्हाइट ज़माने से लेकर आज तक, भारतीय फिल्मों के कथानक में भगवान गणेश की पूजा सबसे शीर्ष पर रही और उनके बाद श्रीकृष्ण की लीलाओं ने भारतीय सिनेमा के पर्दे को भक्ति और आनंद से सराबोर रखा।
--------------------------------------------------------------------------------------------------------------------

























