फिल्मी दुनिया परदे पर जितनी चमकदार दिखती है, भीतर उतनी ही जोखिमों और उतार-चढ़ाव से भरी होती है। यहां स्टारडम रातों-रात आसमान छूता है, तो कभी एक फ्लॉप फिल्म या गलत निवेश कलाकारों को आर्थिक संकट में धकेलने से भी नहीं चूकता। कई नामी सितारे ऐसे रहे, जिन्होंने अपने करियर के चरम पर कर्ज, नुकसान और यहां तक कि दिवालियेपन की स्थिति देखी है। लेकिन, इन संघर्षों की खास बात यह है कि ज्यादातर कलाकारों ने हार नहीं मानी और मेहनत से वापसी कर अपनी पहचान फिर मजबूत की। पुराने दौर से लगाकर राजपाल यादव तक का उदाहरण सितारों के संघर्ष का असली चेहरा है। इस प्रसंग ने एक बार फिर यह सवाल उठाया कि आर्थिक संकट और फिल्म इंडस्ट्री का रिश्ता कितना पुराना है। फिल्म इतिहास के पन्नों पर उन सितारों की कहानियां दर्ज हैं, जिन्होंने गिरकर भी खुद को संभाला है।
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● हेमंत पाल
राजपाल यादव अपनी नैसर्गिक कॉमेडी के लिए पहचाने जाते हैं। ऐसी कई फ़िल्में याद की जा सकती है, जिसमें इस अभिनेता ने कालजयी किरदार किए। लेकिन, फिल्म 'अता पता लापता' के निर्माण के लिए उन्होंने करीब 5 करोड़ रुपए का लोन लिया था। फिल्म 2012 में रिलीज हुई, पर बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही। इसके बाद उनपर आर्थिक दबाव बढ़ता गया और कर्ज बढ़कर लगभग 9 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। लंबे समय तक कानूनी विवाद चलता रहा और अंततः उन्हें तिहाड़ जेल में सरेंडर करना पड़ा। यह घटना दिखाती है, कि फिल्म निर्माण का जोखिम कितना बड़ा हो सकता है। एक गलत प्रोजेक्ट सालों की मेहनत और कमाई पर भारी पड़ सकता है। यह पहली घटना नहीं है, जब कोई फिल्म अभिनेता ऐसी मुसीबत में फंसा हो।
आर्थिक संकट में फंसने और उबरने की सबसे चर्चित कहानी अमिताभ बच्चन की है। 90 के दशक में उनकी कंपनी 'अमिताभ बच्चन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एबीसीएल) भारी घाटे में चली गई। उन पर करीब 90 करोड़ का कर्ज और दर्जनों कानूनी केस थे। उस दौर में उनकी फिल्में भी लगातार फ्लॉप हुई। ऐसे समय में यश चोपड़ा ने उन्हें फिल्म 'मोहब्बतें' में मौका दिया, जिसने उनकी दूसरी पारी की शुरुआत की। इसके बाद टीवी शो और नई फिल्मों ने उन्हें फिर सुपरस्टार बना दिया। धीरे-धीरे उनकी फ़िल्में हिट हुई और फिर 'कौन बनेगा करोड़पति' जैसे टीवी शो ने उन्हें सारे संकटों से उबार दिया। आज उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत मानी जाती है और यह उदाहरण बताता है कि सही मौके और मेहनत से संकट से निकला जा सकता है। हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े शोमैन कहे जाने वाले राज कपूर को भी अपने दौर में भारी नुकसान झेलना पड़ा। उनकी महत्वाकांक्षी फिल्म 'मेरा नाम जोकर' बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हुई और वे लगभग दिवालियेपन की कगार पर पहुंच गए। कहा तो यहां तक जाता है कि उनका बंगला तक गिरवी था। लेकिन, उन्होंने हार नहीं मानी धीरे-धीरे संभले। लेकिन, इस संकट से उन्हें बाहर निकाला बाद में बनाई एक फिल्म ने। कुछ साल बाद राज कपूर ने अपने बेटे ऋषि कपूर और डिंपल कापड़िया को लेकर प्रेम कहानी 'बॉबी' बनाई, जिसने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड कमाई की और उनके करियर को नई जिंदगी दी। यह कहानी एक फ़िल्मकार का जुझारूपन बताती है कि एक असफलता पूरी पहचान खत्म नहीं करती। कोशिश की जाए, असफलता को सफलता में बदला जा सकता है।
इसी तरह प्रतिभाशाली फिल्मकार गुरु दत्त ने भी कई महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश किया था। उनकी फिल्मों को बाद में क्लासिक माना गया, लेकिन रिलीज के समय अपेक्षित कमाई न होने से आर्थिक दबाव बना रहा। 50-60 के दशक के लोकप्रिय अभिनेता भारत भूषण भी आर्थिक संकट का शिकार हुए। शुरुआती सफलता के बाद उनकी फिल्में नहीं चलीं और गलत निवेश के कारण उन्हें अपना घर तक बेचना पड़ा। जीवन के अंतिम वर्षों में उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जो बताता है कि फिल्मों में स्टारडम कभी स्थायी नहीं होता। फिल्म इंडस्ट्री में राजेश खन्ना से बड़ा कोई सितारा नहीं रहा। लगातार 16 हिट फ़िल्में देने वाले इस कलाकार के कुछ गलत फैसलों ने उन्हें असफलता की तरफ धकेल दिया। इसके बाद वे कभी उबर नहीं पाए। पुराने दौर की त्रासदियों में मीना कुमारी का नाम भी लिया जाता है। बेहतरीन अभिनय के बावजूद निजी जिंदगी की समस्याओं और गलत आर्थिक फैसलों ने उन्हें कर्ज में डुबो दिया। उनके आखिरी वर्षों में आर्थिक स्थिति काफी कमजोर रही। उनकी कहानी फिल्मी दुनिया की भावनात्मक और आर्थिक असुरक्षा दोनों को उजागर करती है।
फिल्म कलाकारों की नई पीढ़ी में भी आर्थिक जोखिम के उदाहरण मिलते हैं। सुपरस्टार शाहरुख खान ने 'रा-वन' जैसी हाई-बजट फिल्म में भारी निवेश किया था। फिल्म ने औसत प्रदर्शन किया और शुरुआती दौर में आर्थिक दबाव बढ़ा, लेकिन बाद की फिल्मों और प्रोडक्शन हाउस की सफलता से उन्होंने स्थिति संभाल ली। उनकी 'पठान' और 'जवान' ने उन्हें फिर रेस में ला दिया। यह उदाहरण दिखाता है कि बड़े सितारे भी जोखिम लेते हैं और कभी-कभी नुकसान उठाते हैं। कभी स्टार रहे जैकी श्रॉफ ने भी लंबा आर्थिक संकट देखा। उन्होंने फिल्म 'बूम' में निवेश किया, जो बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल रही। नुकसान इतना बड़ा था कि उन्हें अपना घर तक बेचना पड़ा। लेकिन उन्होंने काम जारी रखा, नए रोल स्वीकार किए और धीरे-धीरे अपनी स्थिति संभाली। आज वे फिल्म और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं। लंबे समय तक कॉमेडी के बादशाह रहे गोविंदा का करियर भी एक दौर में ठहर गया। कम और गलत फिल्में मिलने के बाद खराब आर्थिक फैसलों के कारण उन्हें परेशानी में डाल दिया। ऐसे में सलमान खान के साथ उनकी फिल्म 'पार्टनर' ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की और गोविंदा को फिर से लोकप्रिय बना दिया। यह उदाहरण इंडस्ट्री में रिश्तों और सहयोग की अहमियत भी दिखाता है।
दक्षिण भारतीय सुपरस्टार कमल हासन ने अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म 'विश्वरूपम' के लिए निजी संपत्ति तक गिरवी रख दी थी। फिल्म रिलीज से पहले विवादों और बैन के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा। बाद में फिल्म रिलीज हुई और धीरे-धीरे स्थिति सुधरी। 2022 में 'विक्रम' की सफलता के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि अब वे अपने कर्ज से पूरी तरह उबर सकते हैं। डिस्को डांसर के नाम से मशहूर मिथुन चक्रवर्ती को भी आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्हें होटल व्यवसाय में नुकसान हुआ और फिल्मी करियर भी धीमा पड़ गया था। फिर, टीवी शो, रियलिटी कार्यक्रमों और नई फिल्मों के जरिए उन्होंने नए सिरे से लोकप्रियता हासिल की और आर्थिक स्थिति मजबूत की। कलाकारों और फिल्मकारों की इन कहानियों से एक बात साफ होती है कि फिल्म इंडस्ट्री में आर्थिक जोखिम हमेशा मौजूद रहता है। कई कलाकार अपने सपनों के प्रोजेक्ट में खुद निवेश करते हैं, जिससे नुकसान की संभावना भी बढ़ जाती है।
इसके अलावा, गलत मैनेजमेंट, खराब सलाह, टैक्स समस्याएं और बदलते ट्रेंड भी आर्थिक संकट की वजह बनते हैं। पुराने दौर में कलाकारों के पास फाइनेंशियल प्लानिंग की जानकारी कम होती थी। जबकि, आज कई सितारे प्रोफेशनल टीम की मदद लेते हैं। हालांकि, इन संघर्षों की सबसे प्रेरक बात उनकी वापसी है। अमिताभ बच्चन से लेकर कमल हासन तक, कई कलाकारों ने दिखाया कि गिरावट अंत नहीं होती। मेहनत, नए अवसर और दर्शकों का समर्थन कलाकारों को फिर खड़ा कर सकता है। साथ ही यह कहानियां नए कलाकारों के लिए सीख भी हैं, सिर्फ सफलता नहीं, बल्कि वित्तीय समझ और सही फैसले भी जरूरी हैं। फिल्मी सितारों की ये कहानियां याद दिलाती हैं कि ग्लैमर के पीछे संघर्ष और जोखिम कम नहीं होते। राजपाल यादव का मामला हो या पुराने दौर के सितारों की त्रासदी, हर कहानी में एक सबक है कि असफलता जीवन का हिस्सा है, लेकिन हिम्मत और मेहनत से वापसी हमेशा संभव है। यही वजह है कि ये सितारे सिर्फ अपनी फिल्मों के लिए नहीं, बल्कि अपने संघर्ष और पुनरुत्थान के लिए भी याद किए जाते हैं।
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