'धुरंधर' ने परदे पर आते ही बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी। रणवीर सिंह की अदाकारी के साथ अक्षय खन्ना का नकारात्मक किरदार दर्शकों के दिलों में बस गया। इस स्पाई थ्रिलर फिल्म ने विवादों के बावजूद अच्छी खासी कमाई की। अक्षय खन्ना के नए अवतार, उनके वायरल डांस और पाकिस्तान विरोध ने फिल्म को चर्चा में ला दिया। यह फिल्म रॉ एजेंट हमजा की पाकिस्तान के ल्यारी इलाके में घुसपैठ की कहानी है, जिसमें अक्षय खन्ना ने रहमान डकैत के रोल में जान फूंक दी। यह फिल्म रियल लाइफ गैंगस्टर रहमान डकैत पर आधारित है। अक्षय का यह किरदार भावनाओं की गहराई, क्रूरता और राजनीतिक महत्वाकांक्षा का मिश्रण है, जो रणवीर के हीरो को भी चुनौती देता है। लंबे समय बाद अक्षय खन्ना का यह रोल उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, वे सादगी से धमाकेदार एंट्री तक सब कुछ निभाते हैं। यह किरदार अक्षय खन्ना को टॉप विलेन की श्रेणी में ला खड़ा करता है। इसलिए फिल्म की ज्यादा लंबाई भी दर्शकों को बांधकर रखती है।
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- हेमंत पाल
फिल्म इतिहास में कुछ ऐसे पल आते हैं, जब किसी अभिनेता के हाथ अचानक कोई ऐसी भूमिका आती है, जो उसके पूरे करियर को नए सिरे से परिभाषित कर देती है। स्पाई-एक्शन थ्रिलर 'धुरंधर' में अक्षय खन्ना के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। आदित्य धर के निर्देशन में बनी यह फिल्म न केवल बॉक्स ऑफिस पर तूफान लाई, बल्कि इसने ऐसी मिसाल बनाई जो साबित करती है, कि सही वक़्त पर, सही किरदार, सही अभिनेता के हाथों में पहुंच जाए तो फिल्म का भाग्य बदल जाता है। रणवीर सिंह के फिल्म का हीरो होते हुए अक्षय खन्ना का रहमान डकैत का नकारात्मक किरदार पूरी फिल्म पर हावी है। यह ऐसी घटना है, जो बॉलीवुड के विलेन-केंद्रित अभिनय के एक नए युग की शुरुआत लगती है। फिल्म में अक्षय खन्ना की रहमान डकैत की भूमिका को कालजयी कहने का कारण यह है, कि यह ऐसा किरदार है जो समय की परतों को भेदकर दर्शकों के मन में जगह बनाता है। बॉलीवुड में अभी तक के यादगार विलेन के किरदारों को देखें तो सभी में एक विशेष गुण है कि वे मनोविज्ञान और आचरण से एक आभामंडल रचते हैं। अक्षय खन्ना का रहमान डकैत का किरदार भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाता है। लेकिन, अपने समकालीन तरीके से।
यह किरदार केवल अपराधी नहीं, ऐसा चरित्र है जिसमें चमक है, आकर्षण है और अंधकार भी। जो हर पल सतह के करीब रहता है। अक्षय ने इन सभी परतों को इतनी निपुणता से निभाया कि दर्शक रहमान को समझ तो सकते हैं, लेकिन उसे माफ नहीं कर सकते। यह एक जटिल भूमिका थी और अक्षय ने उसे तन्मयता से निभाया। 'धुरंधर' की सफलता और अक्षय खन्ना की नकारात्मक भूमिका का सराहा जाना, यह सब मिलकर संदेश देते हैं कि सिनेमा केवल लीड रोल तक सीमित नहीं है। असल कलाकार किसी भी भूमिका से अपनी पहचान बना सकता है। 'धुरंधर' का यह धमाका दिखाता है, कि फिल्म इंडस्ट्री में सफलता केवल बड़े नामों से नहीं, बल्कि सही किरदार, सही निर्देशन और सही अभिनेता के संयोग से मिलती है। अक्षय खन्ना, जो दो दशकों तक एक प्रतिभाशाली लेकिन अपरिचित अभिनेता रहे, वे अब नकारात्मक किरदार के नए आइकन बन गए। उनकी यह अभिनय यात्रा न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक संदेश भी देती है कि सफलता की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। कोई अभिनेता कभी भी, किसी भी भूमिका में अपनी पहचान बना सकता है।
अक्षय खन्ना 28 साल की मेहनत के बाद एक ऐसे मंच पर पहुंचे, जहां उन्हें न केवल पहचान मिली, बल्कि एक नए युग की नींव भी रखी गई। यही है विलेन केंद्रित अभिनय का नया युग। इस फिल्म में विलेन के किरदार को अक्षय खन्ना के पुनर्जन्म की तरह समझा जा सकता है। लेकिन, इसे समझने के लिए उनके लंबे लेकिन अदृश्य रहे करियर को समझना भी जरूरी है। फिल्म परिवार का सदस्य होते हुए भी उन्हें विनोद खन्ना के बेटे जैसा स्टारडम कभी नहीं मिला। 1997 में 'हिमालय पुत्र' से करियर की शुरुआत करने वाले अक्षय ने जेपी दत्ता की फिल्म 'बॉर्डर' में फौजी की भूमिका निभाई। फिल्म तो ब्लॉकबस्टर साबित हुई, पर बॉर्डर की सफलता उन्हें स्टारडम नहीं दे सकी। इसके बाद 40 से अधिक फिल्मों में काम करने के बाद भी वे हमेशा एक सलीकेदार, प्रतिभाशाली लेकिन अदृश्य अभिनेता बने रहे। सिनेमाघर से बाहर निकलने वाले दर्शकों को वे कभी याद नहीं रहे। हंगामा (2003) में उनका कॉमेडी रोल कालजयी माना जाता है, जहां उन्होंने 'जीतू वीडियोकॉन' की भूमिका में हास्य की ऐसी परिभाषा दी, जिसे दर्शक आज भी उन्हें इसी किरदार से पहचानते हैं। ताल, हलचल और 'दृश्यम-2' जैसी फिल्मों में भी उन्होंने शानदार अभिनय किया। लेकिन, कहीं न कहीं पॉजिटिव भूमिकाएं उन्हें स्थापित हीरो नहीं बना सकी। ढाई दशक से ज्यादा कड़ी मेहनत करने के बाद भी अक्षय खन्ना प्रतिभाशाली अभिनेता के रूप में जाने जाते रहे, सुपरस्टार कभी नहीं बने। अक्षय खन्ना के अभिनय को समझना एक तरह से आधुनिक नाटकीय अभिनय के सूक्ष्मताओं को समझना है। वे ऐसे अभिनेता हैं, जो बहुत कम बोलते हैं, लेकिन जब बोलते हैं तो हर शब्द में वजन होता है। उनकी आंखों की भाषा, उनके चेहरे की सूक्ष्म अभिव्यक्ति और बॉडी लैंग्वेज ये सब मिलकर एक पूरा किरदार रचते हैं।
'धुरंधर' के रहमान डकैत के रोल में अक्षय इसे नई ऊंचाई पर ले गए। अक्षय का यह किरदार सिर्फ एक अभिनय नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक घटना बन गया। 'हंगामा' में उनका हल्का-फुल्का रूप और 'धुरंधर' में उनकी खतरनाक भूमिका अक्षय के अभिनय की विविधता को समझाती हैं। यह ऐसा बदलाव है, जो दर्शकों को विश्वास दिलाता है, कि सिनेमा केवल अभिनय नहीं, बल्कि परिवर्तन की अनोखी कला है। यह तथ्य सबसे अधिक दिलचस्प है, कि रणवीर सिंह जो फिल्म के हीरो हैं, अक्षय के किरदार से पूरी तरह ओवरशैडो हो गए। यह असामान्य घटना फिल्म इंडस्ट्री में कभी-कभार घटती है। लेकिन, 'धुरंधर' में यह स्पष्ट दिखाई दी। रणवीर एक प्रतिष्ठित अभिनेता हैं, लेकिन अक्षय की उपस्थिति इतनी प्रभावशाली है कि हर दृश्य में वे फिल्म को अपने नाम कर लेते हैं। यह एक अलग किस्म की ताकत है, न कि नायकत्व की, न हिंसा की, बल्कि अभिनय की शक्ति की। अक्षय खन्ना की यह वापसी एक नया मानदंड स्थापित करती है। अब यह साफ है कि यदि कोई निर्माता अपनी फिल्म के लिए खूबसूरत चेहरे वाला विलेन चाहता है, तो अक्षय खन्ना उसकी पहली पसंद होंगे।
अक्षय खन्ना के लिए 2025 का साल अभिनय जीवन का बदलाव वाला दौर रहा। इस साल आई दो फिल्मों के नकारात्मक किरदार ने सब कुछ बदल दिया। पहले आई फिल्म 'छावा' में अक्षय ने औरंगजेब का जो किरदार निभाया, उसे जबरदस्त सराहा गया। लेकिन, 'धुरंधर' में अक्षय खन्ना के रहमान डकैत के किरदार ऐसा चमत्कार किया, जिसने विलेन के नए मानदंड स्थापित कर दिए। पाकिस्तानी अंडरवर्ल्ड के इस खतरनाक डकैत को अक्षय ने इस तरह जीवंत किया, मानो वह अभिनय नहीं, सच्चाई को परदे पर उतार रहे हों। उनके किरदार रहमान का सबसे खास पहचान है शांति और ठंडक। फिल्म में यह किरदार ऐसा विलेन नहीं है, जो चीखता-चिल्लाता है, बल्कि एक ऐसा पात्र है, जो खामोशी में मौत बिखेरता है। उसकी आंखों में जो ख़ामोशी है, जो किसी भी संवाद को बेमानी कर देती है। अक्षय ने अपनी अदाकारी से दिखा दिया कि दमदार एक्टिंग के लिए चीखना-चिल्लाना जरूरी नहीं। उनकी खामोशी में भी इतना वजन था कि हर दृश्य खास हो गया।
'धुरंधर' की जिस बात ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, वह है अक्षय का वह अनोखा सीन जिसमें वे 'फसला' नामक अरबी गाने पर डांस करते हैं। यह गाना बहरीनी डीजे सिंगर ईप फराजी ने 2022 में बनाया गया था। लेकिन, 'धुरंधर' में इसका उपयोग एक खास सीन में किया गया है। इसमें अक्षय की एंट्री इतनी शानदार है, कि वे दर्शकों के दिल पर छा गए। सोशल मीडिया पर इस सीन की तुलना 'एनिमल' के 'जमाल कुडू' गाने से की जाने लगी। क्योंकि, दोनों ही गानों में विलेन की एंट्री यादगार है। यह सीन सिर्फ एक डांस वाला दृश्य नहीं, इसमें अक्षय के किरदार की पूरी ऊर्जा है, जो उनको एक ही फ्रेम में सेलुलॉइड पर कैद कर देता है।
फिल्म का यह गाना अक्षय खन्ना की एंट्री का हाइलाइट है, जो बलूच वॉर डांस से प्रेरित है। यह इम्प्रोवाइज्ड डांस एक टेक में शूट हुआ, जहां अक्षय खन्ना ने खुद ही नए स्टेप्स जोड़े। कोरियोग्राफर विजय गांगुली के मुताबिक, यह सीन लास्ट मिनट का था, लेकिन अक्षय खन्ना का जोश में आने से यह आइकॉनिक बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल होने से गाना हिट हो गया, जिसने फिल्म की मार्केटिंग को भी आसमान पर पहुंचा दिया। यह डांस न सिर्फ दर्शकों को रोमांचित करता है, बल्कि बलूच कल्चर को भी हाईलाइट करता है। फिल्म में अक्षय की विलेन की भूमिका प्रभावशाली और सफल प्रयोग कहा जा सकता है। लेकिन, करियर में विलेन भूमिकाओं का उनका पहला रोल नहीं है। अक्षय ने अभी तक 6 फिल्मों में ऐसी भूमिकाएं निभाई और हर बार उन्होंने दर्शकों को प्रभावित किया। 2002 में आई फिल्म 'हमराज' में भी उन्होंने विलेन की भूमिका निभाई। इसी साल आई 'दीवानगी' में भी उन्होंने नकारात्मक किरदार में अच्छा प्रदर्शन किया। 2008 की 'रेस' में अभय देओल के साथ रोमांचक दृश्य बनाने वाले अक्षय का विलेन रोल भी कमाल का था। 2016 में 'ढिशूम' में भी उन्होंने इसी तरह का रोल किया। लेकिन, 2025 में 'छावा' और 'धुरंधर' ने एक नया दौर शुरू किया। 'छावा' में औरंगजेब की भूमिका करके पूरी इंडस्ट्री को दिखा दिया कि वे अपने अभिनय में पलट भी सकते हैं। लेकिन, 'धुरंधर' में अक्षय के रहमान डकैत ने तो इतिहास रच दिया। वो सिर्फ विलेन नहीं, ऐसा किरदार है, जो बॉबी देओल और संजय दत्त जैसे दिग्गज विलेन अभिनेताओं के लिए खतरा बन गया।
बॉक्स ऑफिस के नजरिए से भी 'धुरंधर' की सफलता की कहानी भी असाधारण है। फिल्म ने 5 दिसंबर को अपनी रिलीज के दिन ही 28 करोड़ की कमाई की, जो रणवीर सिंह के करियर की सबसे बड़ी ओपनिंग थी। पहले सोमवार को फिल्म ने 23.25 करोड़ की कमाई की, जो दर्शकों में फिल्म की मजबूत पकड़ दिखाता है। शुरू के पांच दिनों में इस फिल्म ने देशभर में 150 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन करके अपना बजट 280 करोड़ को पार करने की ओर तेजी से बढ़ गई। सातवें दिन तक यह आंकड़ा 200 करोड़ को पार कर चुका था और दसवें दिन फिल्म ने 351.75 करोड़ का घरेलू कलेक्शन हासिल कर लिया। जबकि दुनिया में इस फिल्म ने 530.75 करोड़ तक पहुंच बना ली। यह सफलता किसी बड़े सितारे की की नहीं, बल्कि दमदार कहानी, जांबाज अभिनय और दर्शकों की माउथ पब्लिसिटी पर आधारित है। लेकिन, फिल्म की सफलता की जो भी कहानी है, वो अक्षय खन्ना से शुरू होकर उन्हीं पर ख़त्म भी होती है।
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