सिनेमा केवल मनोरंजन का जरिया नहीं रहा, बल्कि उसने समाज के रिश्तों, संस्कारों और भावनाओं को भी अपने भीतर समेटकर रखा है। हिंदी फिल्मों के गीतों ने इन रिश्तों को शब्द और संगीत के माध्यम से अमर बनाया। माँ की ममता, भाई-बहन के स्नेह और प्रेम के गीतों की तरह पिता पर आधारित गीतों की संख्या भले अपेक्षाकृत कम रही हो, लेकिन जो भी गीत रचे गए, उन्होंने श्रोताओं के मन पर गहरी छाप छोड़ी। पिता का चरित्र भारतीय परिवारों में त्याग, अनुशासन, संरक्षण और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि फिल्मों में पिता पर लिखे गए गीत केवल भावुकता नहीं, बल्कि सम्मान, विश्वास और जीवन-मूल्यों की अभिव्यक्ति भी बन गए।
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- हेमंत पाल
हिंदी सिनेमा के आरंभिक दौर में पिता की भूमिका परिवार के मुखिया और संरक्षक की होती थी। उस समय पिता पर सीधे गीत कम लिखे गए, लेकिन पिता की संवेदनाओं और जिम्मेदारियों को कई गीतों में अभिव्यक्ति मिली। सन 1968 में प्रदर्शित फिल्म 'नीलकमल' का अमर गीत 'बाबुल की दुआएँ लेती जा, जा तुझको सुखी संसार मिले' पिता की भावनाओं का सबसे मार्मिक उदाहरण है। मोहम्मद रफ़ी की करुण आवाज में गाए इस गीत को साहिर लुधियानवी ने लिखा और रवि ने संगीतबद्ध किया। यह गीत बलराज साहनी पर फिल्माया गया था, जो अपनी बेटी की विदाई के समय उसे आशीर्वाद देते हैं। पिता-पुत्री के रिश्तों की बात करें तो 'राज़ी' (2018) का गीत 'दिलबरो' एक अलग ही भावभूमि रचता है। गुलज़ार के संवेदनशील शब्दों और शंकर-एहसान-लॉय के संगीत से सजा यह गीत बेटी की विदाई के दर्द को बेहद सादगी और गहराई से प्रस्तुत करता है।
सन 2016 में आई 'दंगल' ने पिता की छवि को एक नए आयाम में प्रस्तुत किया। फिल्म का लोकप्रिय गीत बापू सेहत के लिए तू तो 'हानिकारक है' अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखा और प्रीतम ने संगीत दिया। गीत बच्चों की दृष्टि से पिता के कठोर अनुशासन को हास्यपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत करता है। महावीर फोगाट की भूमिका में आमिर खान और उनकी बेटियों पर फिल्माया गया यह गीत बताता है कि कभी-कभी पिता की सख्ती ही बच्चों की सफलता की नींव बनती है।
इसी तरह, एक पिता के लिए उसकी बेटी का विदा होना जिंदगी का सबसे भावुक पल होता है। इस दर्द और लाड़ को साल 2001 की फिल्म 'लज्जा' के गाने 'बड़ी मुश्किल है, खोया मेरा दिल है' से इतर, अगर हम पिता-पुत्री के शुद्ध रिश्ते की बात करें, तो सुभाष घई की फिल्म 'यादें' (2001) का शीर्षक गीत 'यादें याद आती हैं' याद आता है। आनंद बख्शी के लिखे इस गीत को एआर रहमान ने संगीत दिया था। जैकी श्रॉफ और उनकी बेटियों के बीच का यह ताना-बाना दिखाता है कि मां की गैरमौजूदगी में एक पिता किस तरह अपनी बेटियों के लिए मां और बाप दोनों की भूमिका निभाता है।
पिता पर केंद्रित गीतों की चर्चा हो और 'पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा, बेटा हमारा ऐसा काम करेगा' का उल्लेख न हो, यह संभव नहीं। सन् 1988 में आई 'कयामत से कयामत तक' का यह गीत हिंदी सिनेमा में पिता और पुत्र के रिश्ते का सबसे लोकप्रिय संगीतात्मक दस्तावेज बन गया। मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे इस गीत को आनंद-मिलिंद ने संगीत दिया और उदित नारायण की आवाज ने इसे अमर बना दिया। यह गीत आमिर खान पर फिल्माया गया था, जो अपने भविष्य के सपनों को लेकर गाता है।
हाल के बरसों में सिनेमा ने पिता के किरदार के साथ प्रयोग करना शुरू किया है। साल 2015 की फिल्म 'पीकू' में दीपिका पादुकोण और अमिताभ बच्चन के बीच एक सनकी मगर बेहद प्यारे पिता-पुत्री के रिश्ते को दिखाया गया। 'अकेले हम अकेले तुम' में पिता आमिर खान और पुत्र के गीत 'तू मेरा दिल, तू मेरी जान' को बाप-बेटे के रिश्तों के बेहतरीन गीतों में गिना जाता है। अजय देवगन की फिल्म 'मैं ऐसा ही हूं' (2005) के गीत 'पापा मेरे पापा' को भी फिल्म के लिए नहीं, बल्कि इस गीत के लिए ज्यादा याद रखा गया है।
90 के दशक के बाद हिंदी सिनेमा में पिता की छवि और अधिक भावनात्मक तथा मानवीय होती गई। सन 2000 में आई फिल्म 'पापा द ग्रेट' का गीत 'ओ मेरे पापा द ग्रेट' सीधे पिता के सम्मान और गौरव का गीत था। समीर के शब्दों और निखिल-विनय के संगीत से सजा यह गीत पिता को परिवार के सबसे बड़े नायक के रूप में प्रस्तुत करता है। इसी क्रम में 'मैं ऐसा ही हूँ' (2005) का गीत 'पापा मेरे पापा, मेरे प्यारे पापा' पिता-पुत्री संबंधों का अत्यंत भावुक चित्रण है। समीर के लिखे शब्दों को हिमेश रेशमिया ने संगीत दिया और सोनू निगम तथा श्रेया घोषाल ने अपनी आवाज़ से इसे विशेष बना दिया। अजय देवगन और बाल कलाकार के बीच फिल्माया गया यह गीत दर्शाता है कि पिता केवल संरक्षक नहीं, बल्कि बच्चे की पूरी दुनिया भी हो सकता है।
सन 2003 में प्रदर्शित 'मैं प्रेम की दीवानी हूँ' का गीत 'पापा की परी हूँ मैं' भी विशेष उल्लेखनीय है। देव कोहली लिखित और अनु मलिक के संगीतबद्ध इस गीत में एक बेटी अपने पिता के स्नेह और लाड़-प्यार को अभिव्यक्त करती है। करीना कपूर पर फिल्माया गया यह गीत उस दौर की नई पीढ़ी की बेटियों और उनके पिता के बीच बढ़ती आत्मीयता को दर्शाता है। 'बॉस' (2013) का गीत 'पिता से है नाम तेरा, पिता पहचान तेरी' इसी सोच का परिणाम है। कुमार के लिखे और मीत ब्रदर्स द्वारा संगीतबद्ध इस गीत को सोनू निगम ने गाया था। अक्षय कुमार और मिथुन चक्रवर्ती पर फिल्माए इस गीत में पिता को व्यक्ति की पहचान और मूल्यों की जड़ के रूप में प्रस्तुत है।
हाल के वर्षों में पिता-पुत्र संबंधों का सबसे जटिल और भावनात्मक चित्रण 'एनिमल' (2023) के गीत 'पापा मेरी जान' में दिखाई देता है। राज शेखर के शब्दों और हर्षवर्धन रामेश्वर के संगीत से सजा यह गीत रणबीर कपूर और अनिल कपूर के बीच रिश्ते की गहराई को अभिव्यक्त करता है। सोनू निगम की आवाज में गाया गया यह गीत उस बेटे की भावनात्मक भूख को दर्शाता है जो अपने पिता के प्रेम और स्वीकृति के लिए जीवन भर तरसता रहता है।
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