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- हेमंत पाल
राजनीतिक गलियारों में एक वीडियो खासी चर्चा में हैं। यह वीडियो दिग्विजय सिंह द्वारा सीएम हाउस के सामने दिए गए धरना स्थल का है। ये तब का है, जब कमलनाथ स्टेट हैंगर पर शिवराज से बात करके सीधे धरना स्थल पर पहुंचते हैं। वीडियो में जो कुछ संवाद दिग्विजय और कमलनाथ के बीच सुनाई और दिखाई दे रहे हैं, उससे जाहिर है कि दोनों के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। ये भी समझा जा रहा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि भाजपा अपनी राजनीति से दोनों नेताओं में फूट डाल रही हो! गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मजाक में इसका इशारा तो दे ही दिया। एक तरफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और दिग्विजय सिंह के बीच मुलाकात को लेकर मुद्दा गरमाया! दूसरी तरफ शिवराज और कमलनाथ के बीच स्टेट हैंगर पर एक-दूसरे का हाथ थामे और मुस्कुराते दिखाई दिए। करीब आधे घंटे तक दोनों नेता बात करते रहे। इसके बाद से ही ये कयास लगाए जाने लगे कि कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा! पार्टी के इन दोनों बड़े नेताओं में तल्खी बढ़ने लगी है। क्योंकि, इस एक घटना ने प्रदेश की राजनीति को ही नहीं, कांग्रेस के अंदर की राजनीति को भी खदबदा दिया। अब इन दो विपरीत प्रसंगों के राजनीतिक मतलब निकाले जाने लगे।
धरना स्थल पर कमलनाथ-दिग्विजय साथ-साथ बैठे थे। तब कमलनाथ और दिग्विजय के बीच जो बात हुई, वो गौर करने वाली थी! इस तल्ख़ बातचीत का जो वीडियो सामने आया, जिसमें दोनों नेता धरना स्थल पर सार्वजनिक रूप से बात करते दिखाई दिए। वहाँ और भी लोग और मीडिया सब मौजूद थे। कमलनाथ बोले 'हम (दिग्विजय सिंह) तो मिले थे, चार दिन पहले, दिग्विजय साहब को बताना था।' इस पर दिग्विजय सिंह ने कहा 'आपको बताने की जरूरत ही नहीं थी।' तो कमलनाथ ने बोले 'ये बात मुझे नहीं बताई चार दिन पहले हम मिले थे, उसके बाद मैं छिंदवाड़ा चला गया।' इस पर दिग्विजय सिंह का जवाब था 'बात ये है कि हम तो डेढ़ महीने से समय मांग रहे थे। ... अब मुख्यमंत्री से मिलने के लिए आपसे क्यों समय मांगे!' दिग्विजय सिंह ने ये बात तल्खी से कही थी। इस पर कमलनाथ झुंझलाकर बोले 'देट्स ट्रू!' दरअसल, कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच जो बातचीत हुई, वो दो बड़े नेताओं के बीच सार्वजनिक स्थल पर हुई सामान्य चर्चा नहीं कही जा सकती। दोनों के बीच बेहद तनाव के हालात नजर आए। संवाद भी ऐसे नहीं थे कि उन्हें सहजता लिया जाए!
उधर, भाजपा नेता और गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी इस मामले में चिकोटी लेकर कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच मतभेद पनपने का इशारा किया। उन्होंने कहा कि कमलनाथ को दिग्विजय सिंह पर भरोसा नहीं होगा, इसलिए उन्हें मुख्यमंत्री से अकेले नहीं मिलने दिया। कमलनाथ जी की दिग्विजय सिंह के प्रति इतनी अविश्वसनीयता ठीक नहीं है। गृह मंत्री ने कहा कि यह अविश्वसनीयता दोनों की मित्रता पर भी प्रश्न चिन्ह लगाती है। वैसे सार्वजनिक रूप से तो यह दोनों अपनी मित्रता का दावा करते दिखते हैं! लेकिन, सच कुछ और दिखा रहा है।
कमलनाथ की अपनी अलग ही राजनीतिक शैली है। वे दोस्ती वाली राजनीति करके विरोधियों को घेरते हैं। जबकि, दिग्विजय सिंह मुद्दों पर आक्रामक रवैया अपनाते हैं और तंज शैली में बयान देते हैं। ऐसे में कहीं न कहीं दोनों के बीच मतभेद होने लगे हैं! दोनों नेताओं ने कभी इस बारे में खुलकर कुछ नहीं कहा। लेकिन, जिस तरह से प्रदेश में राजनीतिक स्थितियां बन रही है, उससे लग रहा है कि दोनों के बीच सब कुछ सामान्य नहीं है। इस बात से इंकार नहीं कि दोनों के बीच तनाव के ये हालात पहले नहीं थे। सिंधिया के कांग्रेस से जाने के बाद जब दोनों के सामने तीसरा कोई नहीं था, तो मतभेद भी पनपने लगे।
ज्योतिरादित्य सिंधिया वाले मामले को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच लम्बा घटनाक्रम चला। जब सिंधिया अपने समर्थकों को लेकर बेंगलुरु गए थे, तब दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ को विश्वास दिलाया था, कि मैं सब मामला संभाल लूंगा! कमलनाथ भी निश्चिंत थे, कि सिंधिया का सेबोटेज कामयाब नहीं होगा! लेकिन, जब सिंधिया ने अपने समर्थकों ने कांग्रेस छोड़कर सरकार गिरा दी, उसके बाद दोनों नेताओं के बीच पहली बार दरार उभरी। जबकि, कमलनाथ की सरकार के दौरान समझा जाता था कि कई मामलों में दिग्विजय सिंह ही फैसले लेते हैं और ये सही था। लेकिन, सिंधिया-प्रसंग के बाद दोनों में जो तनाव उभरा, वो कई जगह सामने आया। लेकिन, धरना विवाद ने इस दरार को और चौड़ा कर दिया है। कुल मिलाकर प्रदेश में कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं के बीच दूरियां बढ़ती जा रही है और इसका पूरा खामियाजा कांग्रेस पार्टी को भुगतना पड़ रहा है।